पानीपत नर्सिंग स्टाफ हड़ताल से अस्पतालों में मरीज परेशान, ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में 2 घंटे काम बंदपानीपत नर्सिंग स्टाफ हड़ताल से अस्पतालों में मरीज परेशान, ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में 2 घंटे काम बंद

पानीपत के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को सोमवार को दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। वजह थी नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल। ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में नर्सिंग ऑफिसर्स सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक काम से दूर रहीं। सबसे ज्यादा असर उन मरीजों पर पड़ा जिन्हें इंजेक्शन, दवा, जांच और प्रसव संबंधी देखभाल की जरूरत थी।

पानीपत। पानीपत नर्सिंग स्टाफ हड़ताल के कारण सोमवार को जिला नागरिक अस्पताल के साथ जिले के सीएचसी और पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा। नर्सिंग ऑफिसर्स ने हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक दो घंटे का काम बंद रखा। इस दौरान अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को इंतजार करना पड़ा। नर्सिंग स्टाफ की कमी से पहले से जूझ रहे स्वास्थ्य संस्थानों में दो घंटे की हड़ताल ने परेशानी और बढ़ा दी।

नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले नर्सिंग स्टाफ जिला नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग के बाहर धरने पर बैठा। एसोसिएशन की जिला प्रधान सुमन पोड़िया ने बताया कि नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन कैथल के आह्वान पर तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल शुरू की गई है। उनके मुताबिक 5 से 7 अक्टूबर तक रोजाना सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक नर्सिंग स्टाफ हड़ताल पर रहेगा।

क्यों विरोध कर रहा है नर्सिंग कैडर?

नर्सिंग स्टाफ का मुख्य विरोध मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर है। कर्मचारियों का कहना है कि नर्सिंग कैडर के लिए लागू की गई ट्रांसफर व्यवस्था उनकी व्यावहारिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में नर्सिंग स्टाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा है।

हरियाणा सरकार ने जून 2026 में Model Online Transfer Policy 2026 अधिसूचित की थी। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के तबादलों के लिए पारदर्शी और मेरिट आधारित व्यवस्था बनाना है। नीति के तहत पात्र कैडरों में ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से ट्रांसफर किए जाने का प्रावधान है।

नर्सिंग संगठनों का कहना है कि स्वास्थ्य संस्थानों में पहले ही कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में ट्रांसफर पॉलिसी लागू होने से कर्मचारियों की तैनाती और अस्पतालों की मौजूदा जरूरतों के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। हालांकि, यह नर्सिंग संगठनों की आपत्ति है और पॉलिसी को लेकर सरकार की ओर से अलग-अलग प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।

सीएचसी और पीएचसी में भी मरीजों को हुई परेशानी

पानीपत के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी हड़ताल का असर दिखाई दिया। इन संस्थानों में पहले से सीमित नर्सिंग स्टाफ के कारण मरीजों को नियमित सेवाओं के लिए इंतजार करना पड़ा।

दो घंटे की हड़ताल के दौरान मरीजों को दवा देने, इंजेक्शन लगाने और अन्य नर्सिंग संबंधी सेवाओं के लिए स्टाफ का इंतजार करना पड़ा। हड़ताल खत्म होने के बाद दोपहर 12 बजे के बाद स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य होने लगीं।

स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग होते हैं जिन्हें नियमित उपचार, ड्रेसिंग, इंजेक्शन या दवा की आवश्यकता होती है। नर्सिंग स्टाफ की भूमिका इन सेवाओं में महत्वपूर्ण होने के कारण दो घंटे की अनुपस्थिति का सीधा असर मरीजों की प्रतीक्षा अवधि पर पड़ा।

जिला अस्पताल की गायनी ओपीडी में भी भीड़

जिला नागरिक अस्पताल में सोमवार को गायनी विभाग में मरीजों की भीड़ बनी रही। ओपीडी समय के बाद भी मरीज अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए।

सबसे ज्यादा परेशानी प्रसव विभाग में भर्ती गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को हुई। गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच के लिए नर्सिंग स्टाफ की जरूरत होती है। हड़ताल के दौरान उन्हें जांच के लिए इंतजार करना पड़ा।

प्रसव विभाग में भर्ती एक गर्भवती के मुताबिक उसे ब्लड प्रेशर, शुगर और बच्चे की धड़कन की जांच के लिए करीब 10 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। सामान्य परिस्थितियों में इन जांचों के लिए मरीजों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता, लेकिन हड़ताल के दौरान स्टाफ की उपलब्धता कम होने से समय बढ़ गया।

यह स्थिति बताती है कि अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका केवल मरीजों को दवा देने तक सीमित नहीं है। भर्ती मरीजों की लगातार निगरानी, जरूरी पैरामीटर की जांच, इंजेक्शन, ग्लूकोज और चिकित्सकीय निर्देशों के अनुसार देखभाल में नर्सिंग स्टाफ की अहम भूमिका होती है।

डॉक्टरों ने संभाली व्यवस्था, ट्रेनी स्टाफ से भी लिया सहयोग

हड़ताल के दौरान अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए मरीजों की सेवाएं जारी रखने का प्रयास किया। उपचाराधीन मरीजों को चिकित्सकों ने भी दवाएं, इंजेक्शन और ग्लूकोज देने का काम संभाला।

इसके अलावा ट्रेनी स्टाफ की मदद भी ली गई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दो घंटे की हड़ताल के दौरान इलाज को पूरी तरह बंद नहीं होने दिया गया।

पानीपत के सीएमओ डॉ. विजय मलिक ने बताया कि नर्सिंग ऑफिसर्स की दो घंटे की हड़ताल के दौरान मरीजों का इलाज प्रभावित नहीं होने दिया गया। उनके अनुसार ट्रेनी स्टाफ के सहयोग से मरीजों की देखभाल की गई।

हालांकि, अस्पताल प्रशासन की ओर से सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है, लेकिन मरीजों की ओर से प्रतीक्षा और परेशानी की स्थिति सामने आई।

बुधवार तक जारी रह सकती है दो घंटे की हड़ताल

नर्सिंग संगठन ने बुधवार तक रोजाना दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी है। यानी मंगलवार और बुधवार को भी सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच नर्सिंग स्टाफ के विरोध प्रदर्शन में शामिल रहने की संभावना है। अन्य रिपोर्टों में भी 5 से 7 अक्टूबर तक रोजाना दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की जानकारी सामने आई है।

इससे अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए अगले दो दिनों में भी इंतजार की स्थिति बन सकती है। हालांकि आपातकालीन सेवाओं और गंभीर मरीजों के उपचार को लेकर अस्पताल प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था महत्वपूर्ण रहेगी।

सरकार की ट्रांसफर पॉलिसी में क्या है?

हरियाणा सरकार की Model Online Transfer Policy 2026 के अनुसार सरकारी कर्मचारियों के तबादलों के लिए ऑनलाइन और मेरिट आधारित व्यवस्था का ढांचा तैयार किया गया है। नीति के मुताबिक सामान्य ऑनलाइन तबादले प्राथमिक रूप से साल में एक बार किए जाने का प्रावधान है। पात्र कर्मचारी ट्रांसफर प्रक्रिया से जुड़ी शिकायत या प्रतिनिधित्व निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से कर सकते हैं। PRMS

सरकार ने कुछ विशेष परिस्थितियों के लिए अलग प्रावधान भी रखे हैं। इनमें कुछ गंभीर स्वास्थ्य परिस्थितियां, परिवार से जुड़ी विशेष परिस्थितियां और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। PRMS

यही वह नीति है जिसके लागू होने को लेकर नर्सिंग कैडर में असंतोष सामने आया है। नर्सिंग संगठन चाहते हैं कि सरकार उनकी व्यावहारिक समस्याओं पर विचार करे और नर्सिंग कैडर के लिए ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर उनकी मांगों पर बातचीत करे।

नर्सिंग स्टाफ की कमी पहले से बड़ी चुनौती

पानीपत जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के सामने पहले से ही मानव संसाधन की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में नर्सिंग स्टाफ की दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल का असर मरीजों की सेवा व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है।

अस्पताल में डॉक्टर मरीज की बीमारी का उपचार तय करता है, लेकिन उस उपचार को मरीज तक पहुंचाने में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। दवा का समय, इंजेक्शन, ड्रिप, मरीज की निगरानी, ऑपरेशन से पहले और बाद की देखभाल तथा गर्भवती महिलाओं की निगरानी जैसी कई जिम्मेदारियां नर्सिंग स्टाफ संभालता है।

इसी वजह से नर्सिंग कैडर से जुड़ी किसी भी प्रशासनिक नीति का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता। उसका प्रभाव अस्पताल की दैनिक व्यवस्था और मरीजों की सेवा पर भी पड़ सकता है।

अब आगे क्या?

नर्सिंग स्टाफ का तीन दिवसीय विरोध बुधवार तक जारी रहने की चेतावनी के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और नर्सिंग संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है।

एक तरफ सरकार की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी का उद्देश्य तबादलों की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है, वहीं दूसरी तरफ नर्सिंग कैडर इस नीति को लेकर अपनी व्यावहारिक दिक्कतें उठा रहा है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच संवाद के जरिए ऐसा रास्ता निकालना मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था, दोनों के हित में होगा।

फिलहाल पानीपत के मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नर्सिंग स्टाफ की सांकेतिक हड़ताल के चलते मंगलवार और बुधवार को भी सुबह 10 से 12 बजे के बीच अस्पतालों में सेवाओं के लिए अतिरिक्त इंतजार करना पड़ सकता है। गंभीर मरीजों और आपातकालीन मामलों के लिए अस्पताल प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भरता रहेगी।