अंबाला छावनी के दयालबाग स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में दानपात्र खोलने और नकदी की गिनती को लेकर रविवार को विवाद बढ़ गया। 2.80 लाख रुपये से अधिक की राशि सामने आने के बाद पूर्व पदाधिकारियों और संगत के विरोध से माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति संभालने के लिए महेश नगर थाना पुलिस को बुलाना पड़ा।
अंबाला। अंबाला पंचमुखी हनुमान मंदिर दानपात्र विवाद रविवार को उस समय चर्चा में आ गया, जब छावनी के दयालबाग स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में दानपात्र खोले जाने और उसमें जमा राशि की गिनती को लेकर पूर्व पदाधिकारियों तथा संगत की ओर से विरोध किया गया। प्रक्रिया के दौरान दानपात्र से 2 लाख 80 हजार रुपये से अधिक की राशि सामने आने की बात कही गई। विरोध बढ़ने पर मंदिर प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए महेश नगर थाना पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस की मौजूदगी में दानपात्र की राशि की गणना कराने का प्रयास किया गया। हालांकि, हंगामे के कारण पूरी गिनती नहीं हो सकी।
मामले में मंदिर संस्था के पूर्व प्रधान रोहतास लाल बतरा और संगत की ओर से संस्था के कुछ पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर, उपलब्ध रिपोर्ट में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। विवाद के बीच हटाए गए पुजारी मनीष को दोबारा कार्यभार सौंपे जाने की बात भी सामने आई है।
सुबह 11 बजे खोला गया दानपात्र
जानकारी के अनुसार रविवार सुबह करीब 11 बजे मंदिर का मुख्य द्वार बंद कर दानपात्र खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस दौरान प्रशासक, एमसी सोमनाथ, केयरटेकर और पुजारी मौजूद थे। दानपात्र खोले जाने की प्रक्रिया के दौरान ही पूर्व पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों की ओर से विरोध शुरू हो गया।
मंदिर में आने वाली दानराशि को लेकर पारदर्शिता और व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाए गए। इसी दौरान स्थानीय निवासियों ने करीब 15 दिन पहले हटाए गए पुजारी मनीष को दोबारा जिम्मेदारी देने की मांग भी उठाई।
मामला केवल दानपात्र की गिनती तक सीमित नहीं रहा। धीरे-धीरे मंदिर प्रशासन और संगत के बीच बातचीत तीखी होती चली गई।
पुजारी मनीष को दोबारा जिम्मेदारी
विवाद के दौरान स्थानीय लोगों और संगत की ओर से हटाए गए पुजारी मनीष को वापस जिम्मेदारी देने की मांग जोर पकड़ती रही। रिपोर्ट के अनुसार, संगत के रोष को देखते हुए बाद में मनीष को दोबारा कार्यभार सौंप दिया गया।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि दानपात्र की गिनती से जुड़े विवाद के साथ हनुमान मंदिर में पूजा व्यवस्था और पुजारी की भूमिका का मुद्दा भी सामने आ गया।
हनुमान मंदिर प्रबंधन से जुड़े किसी भी विवाद में श्रद्धालुओं के बीच पारदर्शिता और व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में आरोपों की बजाय आधिकारिक रिकॉर्ड, संस्था की कार्यवाही और संबंधित पक्षों के जवाब से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
पूर्व प्रधान ने लगाए गंभीर आरोप
संस्था के पूर्व प्रधान रोहतास लाल बतरा और संगत की ओर से आरोप लगाया गया कि कैशियर संदीप गुप्ता और पूर्व महासचिव विजय शर्मा मंदिर पर कब्जा करना चाहते हैं।
यह एक गंभीर आरोप है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित आरोपित पक्षों का विस्तृत जवाब दर्ज नहीं है। इसलिए इस खबर में इसे आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।
मामले में संस्था के कार्यवाही रजिस्टर को लेकर भी सवाल उठाया गया। आरोप है कि संदीप गुप्ता संस्था का कार्यवाही रजिस्टर अपने साथ ले गए थे और प्रशासक अभी तक उसे वापस नहीं ला सके हैं।
यदि किसी संस्था के आधिकारिक रिकॉर्ड को लेकर विवाद हो, तो उसके दस्तावेज और रिकॉर्ड की स्थिति मामले को समझने में महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, इस मामले में रजिस्टर को लेकर लगाए गए आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
जवाब से संतुष्ट नहीं हुई संगत, बढ़ा विवाद
रविवार को दानपात्र की प्रक्रिया के दौरान स्थानीय निवासी और संगत प्रशासन से सवाल कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, पुजारी मनीष को हटाए जाने के कारणों को लेकर भी सवाल किए गए।
संगत की ओर से प्रशासक से जवाब मांगा गया। आरोप है कि स्पष्ट जवाब नहीं मिलने और मामले को टालने की स्थिति से लोगों में नाराजगी बढ़ती गई।
शाम तक स्थिति ऐसी हो गई कि संगत की ओर से प्रशासक की गाड़ी का घेराव करने की चेतावनी दी गई।
स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासक ने पुलिस को सूचना दी।
महेश नगर थाना पुलिस पहुंची
सूचना मिलने के बाद महेश नगर थाना से एसआई तेजेंद्र पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी के बाद स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया गया।
हनुमान मंदिर परिसर में पुलिस की मौजूदगी का उद्देश्य किसी पक्ष को समर्थन देना नहीं बल्कि विवाद को बढ़ने से रोकना और मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।
पुलिस के पहुंचने के बाद दानपात्र में मौजूद राशि की गणना कराने का प्रयास किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक दानपात्र से 2 लाख 80 हजार रुपये से अधिक की राशि सामने आई, लेकिन हंगामे के चलते गिनती पूरी नहीं हो सकी।
दानपात्र में कितनी राशि थी?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला सवाल यही है कि मंदिर के दानपात्र में कुल कितनी राशि जमा थी।
उपलब्ध रिपोर्ट में 2 लाख 80 हजार रुपये से अधिक राशि निकलने की बात कही गई है। लेकिन उसी रिपोर्ट के अनुसार विवाद और हंगामे के कारण गिनती पूरी नहीं हो सकी।
इसलिए अभी इसे अंतिम आधिकारिक कुल राशि के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। अंतिम राशि तभी स्पष्ट होगी जब पूरी गिनती पूरी हो और उसका आधिकारिक हिसाब सामने आए।
यही वह बिंदु है जहां हनुमान मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता महत्वपूर्ण हो जाती है। पूरी गिनती, उपस्थित लोगों का रिकॉर्ड और राशि के आधिकारिक हिसाब से आगे की स्थिति साफ हो सकती है।
विवाद की जड़ सिर्फ दानपात्र नहीं
पूरे घटनाक्रम को देखें तो विवाद केवल दानपात्र खोलने तक सीमित नहीं दिखाई देता। इसके साथ अंबाला पंचमुखी हनुमान मंदिर की संस्था के प्रबंधन, कार्यवाही रजिस्टर, पुजारी मनीष को हटाए जाने और संस्था के पदाधिकारियों के बीच मतभेद जैसे मुद्दे भी जुड़े हुए हैं।
इसी वजह से रविवार को शुरू हुई सामान्य दानपात्र प्रक्रिया धीरे-धीरे विवाद में बदल गई।
हनुमान मंदिर जैसे धार्मिक स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुड़े होते हैं। ऐसे में प्रबंधन संबंधी विवाद का सीधा असर वहां आने वाली संगत पर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी पक्ष के आरोपों को अंतिम सत्य मानने की बजाय दस्तावेजों और आधिकारिक जांच/जवाब के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
अब आगे क्या होगा?
इस घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि दानपात्र की पूरी गिनती कब और किसकी मौजूदगी में होगी।
साथ ही संस्था के कार्यवाही रजिस्टर को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। पुजारी मनीष को दोबारा जिम्मेदारी मिलने के बाद हनुमान मंदिर की पूजा व्यवस्था सामान्य रहती है या प्रबंधन स्तर पर कोई नया निर्णय होता है, इस पर भी नजर रहेगी।
यदि संस्था की ओर से दानराशि का आधिकारिक विवरण जारी किया जाता है या संबंधित पक्ष अपने आरोपों/जवाब के साथ सामने आते हैं, तो विवाद की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल रविवार की घटना में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मौके पर स्थिति शांत कराने का प्रयास किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, दानपात्र की गिनती हंगामे के कारण पूरी नहीं हो पाई।

